Skip to main content

नोट बदलते देश बदलते आपकी अवस्था बदल दी जाएगी, जीवित से मरणासन्न!!

Image result for 100 rs note new

100 करोड़ खर्च करके एटीएम को इस लायक बनाया जाए कि उसमें से 100 रुपए के बैंगन की शक्ल के नोट निकल सकें, यह कोई मानसिक रूप से स्वस्थ आदमी सोच सकता है?

यह क्यों किया गया नोटों का रंग अलग इसके पीछे का लॉजिक क्या है? चलिये पुराने नोट आपको बंद करने थे,तमाम दावों के साथ कि काला धन समाप्त हो जाएगा,आतंकवाद की कमर..नक्सलवाद के घुटने.. घोटालेबाज़ोंj के अंग विशेष इत्यादि टूट जाएंगे..हालांकि इनमें से कुछ नही हुआ लेकिन सवाल यह कि रंग रूप नोट का बदलने के पीछे औचित्य क्या था?

औचित्य था इतिहास में अमर हो जाने का, उनको नेहरू बनना है.. हाँ उनको गाँधी बनना है..उनको गाँधी परिवार से इतनी नफ़रत है कि वो वही बनना चाहते हैं,कहते भी हैं ना कि किसी से जब हद से ज़्यादा नफ़रत करने लगो तो तुम भी उसी की तरह बन जाते हो,बनना चाहते हो!

पहले नेहरू की तरह वस्त्र धारण किए,गुलाब भी लगा के देखा जेब में,बच्चो के कान मरोड़ कर भी कोशिश की चाचा बनने की..एग्ज़ाम लठैत नामक पुस्तक भी लिखी मतलब मानसिक ग़रीबो का एक डुप्लीकेट सस्ता नेहरू जैसा हो सकता था वह सब किया..लेकिनj अभी भी कुछ बाकी था, इतिहास में नाम दर्ज करना था

तो एक कुंठित बच्चे ने जिसे बचपन से मन था कि जब कुछ बना बड़े होकर, आग लगा दूँगा अपने मन की करके.. उसने नोटों में रंग भरने की सोची.. किसी नोट को बैंगन किसी को लस्सन किसी को अदरक बना दिया और यह करने की ज़िद में वह आपके हमारे टैक्स के पैसों की तिलांजलि दिये चले जा रहा है.. अर्थ व्यवस्था की मौत नही होगी हत्या होगी और हत्यारे को सिर्फ़ इतिहास में नेहरू बनने की सनक सवार है!

इस फकीर हार्डवर्क यूनिवर्सिटी के कामदार राष्ट्रऋषि सस्ते नेहरू की सनक कहीं का नही छोड़ेगी, समय रहते बदल दो वरना यह नोट बदलते देश बदलते आपकी अवस्था बदल देगा जीवित से मरणासन्न!!

गुपचुप व्यक्ति द्वारा रचित |

Comments

Popular posts from this blog

क्या यही वजह रही होगी, हमारे बुजुर्गों की जो लड़की पैदा होने से घबराते थे ?

क्या यही वजह रही होगी हमारी पुरानी पीढ़ियों की जो कहते थे की लड़का पैदा करो लड़की नहीं |  आज एक और रेप केस के बारे में पता चला, मध्य प्रदेश के इंदौर की बात है, ६ महीने की बच्ची के साथ संभावित बलात्कार हुआ और उसको मार दिया गया, मुझे ये लिखते हुए भी शर्म आ रही है, अब सोचो उस व्यक्ति ने कैसे ये घिनौना काम किया होगा| अब तो बस यही लगता है, यही अंत है इस कलयुग का| लोगों की मानसिकता ही बदल गयी हैं | कभी ७० साल की बुज़ुर्ग महिला के साथ तो कभी ६ महीने की बच्ची के साथ | हमारे बुजुर्ग शायद ये भांप गए थे की आने वाले ज़माने में अपनी लड़की की इज्ज़त बचाना बहुत ही मुश्किल है, इसलिए वो लड़का चाहते थे|  अभी उस बच्ची का पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने में देर है, और उससे साफ़ हो जायेगा की बच्ची को मारा गया और उसके साथ बलात्कार हुआ की नहीं | कुछ न्यूज़ वाले ये बता रहे हैं की उसके साथ बलात्कार हुआ है | पर जैसा की मैंने कहा था, तथ्यों पर विश्वास करें, बातों पर नहीं |

क्या हम कोर्ट और एस०आई०टी० से ज्यादा ज्ञानी हैं ? जो व्हात्सप्प पर केस को पूरा करेंगे |

जी हाँ, आज कल व्हात्सप्प और फेसबुक के बढ़ते हुए चलन को देख कर लगता है, दुनिया भर की सच्चाई इसी में है बस, लोग चाहे बच्चे हों बूढ़े हों या जवान हों, सब इसमें इतने मशगूल रहते हैं की सच्चाई क्या है, इन्हें ये भी पता नहीं  रहता | आज आसिफा के केस के कुल 3 महीने होने को आये हैं, और दोषियों को पकड़ कर सिर्फ ये बातें हो रहीं हैं की ये गुनाहगार है की नहीं | वहीँ दूसरी ओर मीडिया का नया राग है, हर न्यूज़ चैनल भी अपने मन मुताबिक खबरें दिखा रहा है | व्हात्सप्प, फेसबुक इनपर भी कहानी कुछ और ही दिखाई जा रही है | मेरा विश्वास न हो तो कोई भी 4 अखबार पिछले ३ दिन के उठ कर पढ़ लो और तो और कोई भी न्यूज़ चैनल लगा कर आप देख सकते हो सब की कहानी एक दुसरे से अलग है , कोई कहता है, रेप नहीं हुआ था, वहीँ कोई दूसरी तरफ दूसरा कहता है की सरे दोषियों ने मिल कर रेप किया है| अब बात आई व्हात्सप्प की जैसे ही कोई बड़ा आदमी फंसता है, व्हात्सप्प पर उसके अच्छे कर्मों की फोटो और वीडियोस वाइरल हो जाती हैं | भगवन बना दिया जाता है | व्हात्सप्प पहले भी मनोरंजन के लिए बना था, और आज भी है, पर कुछ लोग उससे भी राजनीती करते हैं, ...