जी हाँ, आज कल व्हात्सप्प और फेसबुक के बढ़ते हुए चलन को देख कर लगता है, दुनिया भर की सच्चाई इसी में है बस, लोग चाहे बच्चे हों बूढ़े हों या जवान हों, सब इसमें इतने मशगूल रहते हैं की सच्चाई क्या है, इन्हें ये भी पता नहीं रहता |
आज आसिफा के केस के कुल 3 महीने होने को आये हैं, और दोषियों को पकड़ कर सिर्फ ये बातें हो रहीं हैं की ये गुनाहगार है की नहीं |
वहीँ दूसरी ओर मीडिया का नया राग है, हर न्यूज़ चैनल भी अपने मन मुताबिक खबरें दिखा रहा है | व्हात्सप्प, फेसबुक इनपर भी कहानी कुछ और ही दिखाई जा रही है |
मेरा विश्वास न हो तो कोई भी 4 अखबार पिछले ३ दिन के उठ कर पढ़ लो और तो और कोई भी न्यूज़ चैनल लगा कर आप देख सकते हो सब की कहानी एक दुसरे से अलग है , कोई कहता है, रेप नहीं हुआ था, वहीँ कोई दूसरी तरफ दूसरा कहता है की सरे दोषियों ने मिल कर रेप किया है|
अब बात आई व्हात्सप्प की जैसे ही कोई बड़ा आदमी फंसता है, व्हात्सप्प पर उसके अच्छे कर्मों की फोटो और वीडियोस वाइरल हो जाती हैं | भगवन बना दिया जाता है |
व्हात्सप्प पहले भी मनोरंजन के लिए बना था, और आज भी है, पर कुछ लोग उससे भी राजनीती करते हैं, लोगो को बुरा बना देते हैं और अच्छा बना देते हैं |
मीडिया पहले सच्चाई दिखाता था, पर अब न्यूज़ देख कर ऐसा लगता नहीं|
बात बची अखबार की जो की सिर्फ अब करंट अफेयर के लिए और सरकारी नौकरी के पेपर पास करने क लिए ही बचा है |
बस अंत में इतना कहना चाहता हूँ, सुनी सुनाई बातों और व्हात्सप्प और फेसबुक के बताये हुए तरीको को न अपनाये| अपने आँखों से देखे और कोर्ट और SIT (Special Investigation Team) की भी सुने और तथ्य को समझे|
अगली बार व्हात्सप्प पर किसी ग्रुप में या प्राइवेट मेसेज में ये मेसेज आये की आ जाओ चौराहे पर रैली निकालनी है क्योंकि असीफा का कातिल निर्दोष है, क्योंकि वो तो उस वक़्त देश में ही नहीं था | तो बिना सोचे समझे फैसला न करें |

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